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विज्ञान भैरव • अध्याय 1 • श्लोक 79
उपविश्यासने सम्यग्बाहु कृत्वाधकुश्चिती | कक्ष्व्योम्नि मनः कुवन्‌ शममायात तद्यात्‌ ॥
सही मुद्रा में बैठकर हाथों और भुजाओं को एक घेरे में मोड़कर दृष्टि को इस स्थान के अंदर स्थिर करें। इस लय से मन शांत हो जाता है।
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