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विज्ञान भैरव • अध्याय 1 • श्लोक 78
मृद्वासने स्फिजेकेन हस्तपादौ निराश्रयम्‌ | निधाय तत्प्रसङ्गेन परा पूणा मातभरवत्‌ ॥
नरम आसन पर बैठकर, एक नितंब के सहारे, हाथों और पैरों को आराम देकर, इस समय मन उत्कृष्टता से परिपूर्ण हो जाता है।
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