इंद्रियों के आनंद, जैसे संगीत या गीत, पर एकाग्रता के परिणामस्वरूप, योगियों को भीतर समान खुशी (या आनंद) का अनुभव होता है। (इस प्रकार) लीन होकर योगी मन से परे चला जाता है और उस (परमात्मा) के साथ एक हो जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
विज्ञान भैरव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
विज्ञान भैरव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।