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विज्ञान भैरव • अध्याय 1 • श्लोक 71
आनन्दे महति प्राप्ते दृष्टे वा बान्धवे चिरात्‌ । आनन्दसमुद्रतम्‌ घ्यात्वा तद्ुयस्तन्मना भवेत्‌ ॥
जब रिश्तेदारों से मिलकर (जैसे किसी घटना के माध्यम से) बहुत खुशी मिलती है, तो व्यक्ति को उस पर एकाग्रचित्त होकर ध्यान करना चाहिए, जब तक कि मन तल्लीन न हो जाए और आनंद उत्पन्न न हो जाए।
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