मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
विज्ञान भैरव • अध्याय 1 • श्लोक 67
सवंस्रोतोनिबन्धेन प्राणराक्तयोध्व॑या शनेः | पिपीलस्पर्शवेलायां प्रथते परमं सुखम्‌ ॥
सभी माध्यमों (धारणा के) को अवरुद्ध करके प्राण-शक्ति धीरे-धीरे ऊपर की ओर (रीढ़ की हड्डी के माध्यम से) बढ़ती है। उस समय शरीर में चींटी के रेंगने की अनुभूति होने पर परम आनंद की अनुभूति होती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
विज्ञान भैरव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

विज्ञान भैरव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें