सभी माध्यमों (धारणा के) को अवरुद्ध करके प्राण-शक्ति धीरे-धीरे ऊपर की ओर (रीढ़ की हड्डी के माध्यम से) बढ़ती है। उस समय शरीर में चींटी के रेंगने की अनुभूति होने पर परम आनंद की अनुभूति होती है।
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