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विज्ञान भैरव • अध्याय 1 • श्लोक 65
सवं जगत्स्वदेहं वा स्वानन्दभरितं स्मरेत्‌ | युगपत्स्वामृतेनेव परानन्दमयो भवेत्‌ ॥
व्यक्ति को एक साथ संपूर्ण ब्रह्मांड या आत्मा के आनंद से भरे अपने शरीर पर चिंतन करना चाहिए। तब अपने ही अमृत के माध्यम से व्यक्ति परम आनंद से जीवंत हो जाता है।
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