मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
विज्ञान भैरव • अध्याय 1 • श्लोक 64
वायुद्वयस्य सम्घट्राद्‌ अन्तर्‌ वा बहिरन्ततः | योगी समत्वविज्ञानसमुद्रमनभाजनम्‌ ॥
शरीर के अंदर या बाहर दोनों वायु (प्राण और अपान) के संलयन से, योगी संतुलन प्राप्त करता है और चेतना की उचित अभिव्यक्ति के लिए उपयुक्त हो जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
विज्ञान भैरव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

विज्ञान भैरव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें