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विज्ञान भैरव • अध्याय 1 • श्लोक 52
कालाग्नि कालपदादुत्थितेन स्वकं पुरम्‌ | ष्टं विचिन्तयेदन्ते शान्ताभासस्तदा भवेत्‌ ॥
मनुष्य को यह विचार करना चाहिए कि उसका अपना शरीर काल की गति से उत्पन्न हुई कालाग्नि से जल गया है। तब अंततः शांति का अनुभव होगा।
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