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विज्ञान भैरव • अध्याय 1 • श्लोक 49
हृदयाकाशे निलीनाक्षः पद्मसम्पुटमघ्यगः | अनन्यचेताः सुभगे परं सोभाग्यमाघ्रुयात्‌ ॥
हे सौभाग्य के अवतार, जो व्यक्ति हृदय स्थान में कमल के मध्य में मंत्र पर आँखें बंद करके और एकाग्र एकाग्रता से चिंतन करता है, उसे सर्वोच्च आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त होती है।
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