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विज्ञान भैरव • अध्याय 1 • श्लोक 38
अनाहते पात्रकर्णऽभय्रराब्दे सवरद्द्रत | शब्दब्रह्मणि निष्णातः परं ब्रह्माधिगच्छति ॥
जो व्यक्ति अनाहत में बिना रुके ध्वनि को सुनने में माहिर है, (जो कि) बहती नदी की तरह निर्बाध है, वह शब्दब्रह्म, ध्वनि के रूप में ब्रह्म के रूप में महारत हासिल करके ब्रह्म की सर्वोच्च स्थिति को प्राप्त करता है।
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