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विज्ञान भैरव • अध्याय 1 • श्लोक 37
घामान्तः क्षोभसम्भूतसृक्ष्माथितिलकाकृतिम्‌ | बिन्दुं शिखान्ते हृदये लयान्ते ध्यायतो लयः ॥
जब भी कोई तिलक के रूप में (माथे पर निशान के रूप में) या शिखा के अंत में बिंदु पर सूक्ष्म लीरा का ध्यान करता है तो उत्तेजना और कंपकंपी की स्थिति उत्पन्न होती है जिसके बाद हृदय की गुफा में अवशोषण और विघटन होता है।
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