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विज्ञान भैरव • अध्याय 1 • श्लोक 31
तयापूर्याशु मूरघान्त॑ भङ्क्त्वा भक्षेपसेतुना | निर्विकल्पं मनः कृत्वा सर्वोर्ध्वे सवंगोद्रमः ॥
फिर, मूर्धा (माथे) की नोक को भरकर और भौंहों के बीच के पुल को पार करके, मन सभी द्वंद्वात्मक विचार प्रतिमान से ऊपर उठ जाता है और सर्वव्यापी (प्रबलित) हो जाता है।
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