मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
विज्ञान भैरव • अध्याय 1 • श्लोक 25
मरुतारन्तबाह वाप वयद्युग्मानवतनात्‌ | भैरव्या भैरवस्येत्थं भैरवि व्यज्यते वपुः ॥
जब अंदर जाने वाली प्राणिक वायु और बाहर जाने वाली प्राणिक वायु दोनों को उनके (संबंधित बिंदुओं) वापसी से उनके स्थान में रोक दिया जाता है, तो भैरव का सार प्रकट होता है, जो भैरवी से अलग नहीं है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
विज्ञान भैरव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

विज्ञान भैरव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें