श्री भैरव ने कहा - परादेवी, जिनकी प्रकृति विसर्ग या रचना है, ऊपर की ओर प्राण और नीचे की ओर जाने वाले अपान के रूप में प्रकट होती हैं। मन को उत्पत्ति के दो बिंदुओं (प्राण और अपान) पर स्थिर करने से पूर्णता की स्थिति उत्पन्न होती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
विज्ञान भैरव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
विज्ञान भैरव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।