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विज्ञान भैरव • अध्याय 1 • श्लोक 24
श्री भैरव उवाच | ऊर्घ्चे प्राणो ह्यधो जीवो विसर्गात्मा परोचरेत्‌ | उत्पत्तिद्धितयस्थाने भरणाद्धरिता स्थितिः ॥
श्री भैरव ने कहा - परादेवी, जिनकी प्रकृति विसर्ग या रचना है, ऊपर की ओर प्राण और नीचे की ओर जाने वाले अपान के रूप में प्रकट होती हैं। मन को उत्पत्ति के दो बिंदुओं (प्राण और अपान) पर स्थिर करने से पूर्णता की स्थिति उत्पन्न होती है।
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