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विज्ञान भैरव • अध्याय 1 • श्लोक 21
यथालोकेन दीपस्य किरणेभास्करस्य | ज्ञायते दिग्विभागादि तद्वच्छक्तया शिवः प्रिये ॥
जिस प्रकार मोमबत्ती की लौ या सूर्य की किरणों से अंतरिक्ष, दिशा और रूप प्रकट होते हैं, उसी प्रकार हे स्पष्ट, शक्ति के माध्यम से शिव प्रकट होते हैं।
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