शक्तयवस्थाप्रविष्टस्य निर्विभागेन भावना |
तदासो शिवरूपी स्यात् शेवी मुखमिहोच्यते ॥
जो व्यक्ति शक्ति की अवस्था में प्रवेश करता है, उसे बिना किसी विभाजन के शिव के साथ तादात्म्य की अनुभूति होती है। तब मनुष्य सचमुच शिवस्वरूप हो जाता है। इस सन्दर्भ में कहा जाता है कि शक्ति ही शिव का स्वरूप है।
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