मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
विज्ञान भैरव • अध्याय 1 • श्लोक 2
अद्यापि न निवृत्तो मे सम्शायः परमेश्वर | किं रूपं त्तो देव शब्दराशिकलामयम्‌ ॥
हे परमेश्वर, मैंने जो कुछ भी सुना है, उसके बावजूद आज भी मेरा संदेह दूर नहीं हुआ है। हे दिव्य, आपकी वास्तविकता क्या है? क्या आप ध्वनि में निहित शक्ति या ऊर्जा हैं जिससे सभी मंत्रों की उत्पत्ति हुई है?
पूरा ग्रंथ पढ़ें
विज्ञान भैरव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

विज्ञान भैरव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें