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विज्ञान भैरव • अध्याय 1 • श्लोक 156
सकारेण बहियांति हकारेण विशेत्‌ पुनः | हंसहंसेत्यमुं मन्त्रं जीवो जपति नित्यशः ॥
सांस को 'हा' ध्वनि के साथ छोड़ा जाता है और दोबारा 'सा' ध्वनि के साथ सांस ली जाती है। इस प्रकार व्यक्ति हमेशा इस विशेष मंत्र हम्सा को दोहराता है।
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