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विज्ञान भैरव • अध्याय 1 • श्लोक 155
अस्यामनुचरन्‌ तिष्ठन्‌ महानन्द्मयेऽध्वरे | तया द्व्या समावह्टः पर भरव जाघुवात्‌ ॥
जो व्यक्ति परम आनंद से भरे इस यज्ञ का पालन करता है और उसमें बना रहता है, वह उस देवी की (कृपा से) परम भैरव अवस्था को प्राप्त करता है।
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