मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
विज्ञान भैरव • अध्याय 1 • श्लोक 147
पूजा नाम न पुष्पाद्येयां मतिः क्रियते दृटा । निर्विकल्पे महाव्योश्नि सा पूजा द्यद्राछ्लयः ॥
फूल आदि चढ़ाना पूजा नहीं है, बल्कि अपने मन को महाकाश में, महान शून्य में, (और निर्विचार) निर्विकल्प में स्थिर करना वास्तव में पूजा है। ऐसी श्रद्धा से (मन का) विघटन होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
विज्ञान भैरव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

विज्ञान भैरव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें