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विज्ञान भैरव • अध्याय 1 • श्लोक 139
निस्तरद्गोपदेशानां शतमुक्तं समासतः | दादशाभ्यधिकं देवि यज्ज्ञात्वा ज्ञानविजनः ॥
हे देवी, मैंने तुम्हें संक्षेप में एक सौ बारह से अधिक तरीके बताए हैं, जिनसे मन बिना किसी विचार के (शांत हो जाता है), जिसे जानकर लोग बुद्धिमान बन जाते हैं।
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