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विज्ञान भैरव • अध्याय 1 • श्लोक 138
मानसं चेतना शक्तिरात्मा चेति चतुष्टयम्‌ | यदा प्रय पार्‌ तदा तद्धरवम्‌ वपुः ॥
हे प्रिय, जब मन, जागरूकता, ऊर्जा और व्यक्तिगत स्व, यह चार की स्थिति विलीन हो जाती है, तब भैरव की स्थिति प्रकट होती है।
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