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विज्ञान भैरव • अध्याय 1 • श्लोक 137
ज्ञानप्रकाराकं सर्वं सर्वेणात्मा प्रकाशक: | एकमिकस्वभावत्वात्ज्ञानं ज्ञेयं विभाव्यते ॥
ज्ञान सब को प्रकट करता है और सब का आत्मा ही प्रकट करने वाला (जानने वाला) है। मनुष्य को ज्ञान और ज्ञाता को एक ही मानकर विचार करना चाहिए।
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