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विज्ञान भैरव • अध्याय 1 • श्लोक 135
न मे बन्धो न मोक्षो मे भीतस्यैता विभीषिकाः | प्राताबम्बामदम्‌ बृद्धजलष्वव ववस्वतः ॥
मेरे लिए न तो बंधन है और न ही मुक्ति। ये डरपोक कायरों को डराते हैं और बुद्धि के प्रतिबिम्ब (प्रक्षेपण) हैं, जैसे सूर्य जल में प्रतिबिम्बित होता है।
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