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विज्ञान भैरव • अध्याय 1 • श्लोक 133
अतत्त्वमिन्द्रजालाभमिदं सवंमवस्थितम्‌ | कं तत्त्वामन्द्रजालस्य इत दाल्याच्छम जत्‌ ॥
यह संसार जादू के समान (मायावी) है, इसमें कोई सार नहीं है। जादू में क्या सार मौजूद है? इस बात पर दृढ़ विश्वास रखने से व्यक्ति को शांति प्राप्त होती है।
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