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विज्ञान भैरव • अध्याय 1 • श्लोक 121
भक्तयुद्रेकाद्विरक्तस्य यादशी जायते मतिः | सा शक्तिः शाङ्करी नित्यं भवयेत्तां ततः रिवः ॥
जो अंतर्ज्ञान पूर्णतः अनासक्त व्यक्ति की गहन भक्ति से उत्पन्न होता है, उसे शंकर की शक्ति के रूप में जाना जाता है। उस (शक्ति) का नियमित चिंतन करने से वहां शिव (प्रकट) होते हैं।
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