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विज्ञान भैरव • अध्याय 1 • श्लोक 120
क्वचिद्वस्तुनि विन्यस्य श्नैदृष्टम् निवर्तयेत्‌ | तज्ज्ञानं चित्तसहितं देवि झून्यालायो भवेत्‌ ॥
हे देवी, क्षण भर के लिए किसी वस्तु पर दृष्टि डालने और धीरे-धीरे उस वस्तु के ज्ञान और प्रभाव से उसे हटाने पर व्यक्ति शून्य का निवास बन जाता है।
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