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विज्ञान भैरव • अध्याय 1 • श्लोक 12
नादबिन्दुमयो वापि न चन्द्राधनिरोधिकाः | न चक्रक्रमसम्भिन्नो न च शक्तिस्वरूपकः ॥
उनके (भैरव के) रूप को नाद और बिंदु में नहीं देखा जा सकता, यहां तक कि बाधित आधे चंद्रमा में भी नहीं, न ही क्रमिक चक्रों के भेदन में, न ही शक्ति, या ऊर्जा, उनके सार का गठन करती है।
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