तत्त्वता न नवात्मासा शब्दराशन भैरवः |
न चासो त्रिशिरा देवो न च शक्तित्रयात्मकः ॥
वास्तव में (भैरव का सार) न तो नौ रूप हैं, न अक्षरों की माला, न तीन धाराएँ और न ही शक्ति की तीन शक्तियाँ।
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