मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
विज्ञान भैरव • अध्याय 1 • श्लोक 102
इन्द्रजालमयं विश्वं व्यस्तं वा चित्रकम॑वत्‌ | श्रमहरा घ्यायतः सव पश्यतश्च सुखाद्रमः ॥
किसी जादू का प्रदर्शन या चित्रकारी की तरह कल्पित या मायावी रूप में प्रकट दुनिया पर ध्यान करने और सभी अस्तित्व को क्षणभंगुर के रूप में देखने से खुशी पैदा होती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
विज्ञान भैरव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

विज्ञान भैरव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें