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विदुर नीति • अध्याय 8 • श्लोक 5
आलस्यं मदमोहौ च चापलं गोष्ठिरव च। स्तब्धता चाभिमानित्यं तथात्यागित्वमेव च। एते वै सप्त दोषाः स्युः सदा विद्यार्थिनां मताः ॥
स्तब्धता आलस्य, मद-मोह, चञ्चलता, गोष्ठी, उद्दण्डता, अभिमान और लोभ-ये सात विद्यार्थियों के लिये सदा ही दोष माने गये हैं।
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