आलस्यं मदमोहौ च चापलं गोष्ठिरव च।
स्तब्धता चाभिमानित्यं तथात्यागित्वमेव च।
एते वै सप्त दोषाः स्युः सदा विद्यार्थिनां मताः ॥
स्तब्धता आलस्य, मद-मोह, चञ्चलता, गोष्ठी, उद्दण्डता, अभिमान और लोभ-ये सात विद्यार्थियों के लिये सदा ही दोष माने गये हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
विदुर नीति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
विदुर नीति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।