सा तु बुद्दिः कृताप्येवं पाण्डवान्रप्ति मे सदा ।
दुर्योधनं समासाद्य पुनर्विपरिवर्तते ॥
यह्यपि मैं पाण्डवो के प्रति सदा ऐसी हो बुद्धि रखता हूँ, तथापि दुर्योधन से मिलने पर फिर बुद्धि पलट जाती है।
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