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विदुर नीति • अध्याय 8 • श्लोक 29
चातुर्वर्ण्यस्यैष धर्मस्तवोक्तो हेतुं चात्र ब्रुवतो मे निबोध । क्षात्राद्धर्माद्धीयते पाण्डुपुत्रस् तं त्वं राजन्राजधर्मे नियुङ्क्ष्व ॥
महाराज आपसे यह मेंने चारों वणौ का धर्म बताया है; इसे बताने का कारण भी सुनिये। आपके कारण पाण्डुनन्दन युधिष्ठिर क्षत्रिय धर्म से अच्युत हो रहे हैं, अतः आप उन्हें पुनः राजधर्म में नियुक्त कीजिये।
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