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विदुर नीति • अध्याय 8 • श्लोक 26
अधीत्य वेदान्परिसंस्तीर्य चाग्नीन् इष्ट्वा यज्ञैः पालयित्वा प्रजाश् च । गोब्राह्मणार्थे शस्त्रपूतान्तरात्मा हतः सङ्ग्रामे क्षत्रियः स्वर्गमेति ॥
वेदों को पढ़कर, अग्निहोत्र के लिये अग्नि के चारो और कुश बिछाकर नाना प्रकार के यज्ञों द्वारा यजन कर और प्रजाजन का पालन करके गौ और ब्राह्मणों के हितके लिये संग्रामनें मूत्युको प्राप्त हआ क्षत्रिय शस्त्रसे अन्त करण मवित्र हो जाने के कारण उर्ध्व लोक को जाता है।
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