इदं वचः शक्ष्यसि चेद्यथावन् निशम्य सर्वं प्रतिपत्तुमेवम् ।
यशः परं प्राप्स्यसि जीवलोके भयं न चामुत्र न चेह तेऽस्ति ॥
मेरी इस बात को सुनकर यदि आप सब ठीक -ठीक समझ सकेंगे तो इस मनुष्य लोक में आप को महान यश प्राप्त होगा और इहलोक तथा परलोक में आपके लिये भय नहीं रहेगा।
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