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विदुर नीति • अध्याय 8 • श्लोक 19
अस्माल्लोकादूर्ध्वममुष्य चाधो महत्तमस्तिष्ठति ह्यन्धकारम् । तद्वै महामोहनमिन्द्रियाणां बुध्यस्व मा त्वां प्रलभेत राजन् ॥
इस लोक और परलोक से ऊपर और नीचे तक सर्वेत्र अज्ञान रूप महान् अन्धकार फ़ैला हुआ है, बह इन्द्रियों को महान् मोह में डालने वाला है। राजन्! आप इस को जान लीजिये, जिससे यह आपका स्पर्श न कर सके।
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