तात ! बिना फल-फूल के वृक्ष को जैसे पक्षी छोड़ देते हैं, उसी प्रकार उस प्रेत को उसके जाति वाले, सुहृद् और पुत्र चिता में छोड़कर लौट आते हैं।
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