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विदुर नीति • अध्याय 8 • श्लोक 14
महाबलान्पश्य मनानुभावान् प्रशास्य भूमिं धनधान्य पूर्णाम् । राज्यानि हित्वा विपुलांश्च भोगान् गतान्नरेन्द्रान्वशमन्तकस्य
धन-धान्यादि से परिपूर्ण पृथ्वी का शासन करके अन्त में समस्त राज्य और विपुल भोगों को यहीं छोड़कर यमराज के वश में गये हुए बड़े-बड़े बलवान् एवं महानुभाव राजाओं की ओर दृष्टि डालिये।
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