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विदुर नीति • अध्याय 7 • श्लोक 83
यत्पृथिव्यां व्रीहि यवं हिरण्यं पशवः स्त्रियः । नालमेकस्य तत्सर्वमिति पश्यन्न मुह्यति ॥
इस पृथ्वी पर जो भी धान, जो, सोना, पशु, और स्त्रियाँ हैं, वे सब के सब एक पुरुष के लिये भी पूरे नहीं हैं, ऐसा विचार करने वाला मनुष्य, मोह में नहीं पड़ता।
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