अधिक राह चलना, देहधारियों के लिये दुखरूप बुढ़ापा है, बराबर पानी गिरना पर्वतों का बुढ़ापा है, सम्भोग से वश्चित रहना स्त्रियों के लिये बुढ़ापा हैं, और वचन रूपी बाणों का आघात, मन के लिये बुढ़ापा है।
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