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विदुर नीति • अध्याय 7 • श्लोक 70
अष्टौ तान्यव्रतघ्नानि आपो मूलं फलं पयः । हविर्ब्राह्मण काम्या च गुरोर्वचनमौषधम् ॥
जल, मूल, फल, दूध, घी, ब्राह्मण की इच्छापूर्ति, गुरु का वचन, और ओषध, ये आठ व्रत के नाशक नहीं होते।
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