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विदुर नीति • अध्याय 7 • श्लोक 68
उत्थानं संयमो दाक्ष्यमप्रमादो धृतिः स्मृतिः । समीक्ष्य च समारम्भो विद्धि मूलं भवस्य तत् ॥
उद्मोग, संयम, दुक्षता, सावधानी, धैर्य, स्मृति, और सौच-विचारकर इन्हें उन्नति का मूलमन्त्र समझिये।
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