अधर्मोपार्जितैरर्थैर्यः करोत्यौर्ध्व देहिकम् ।
न स तस्य फलं प्रेत्य भुङ्क्तेऽर्थस्य दुरागमात् ॥
जो अधर्म के द्वारा कमाये हुए धन से, परलोक साधक यज्ञादि कर्म करता है, वह मरने के पश्चात्, उसके फल को नहीं पाता, क्योकि उसका धन बुरे रास्ते से आया होता है।
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