मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
विदुर नीति • अध्याय 7 • श्लोक 66
अधर्मोपार्जितैरर्थैर्यः करोत्यौर्ध्व देहिकम् । न स तस्य फलं प्रेत्य भुङ्क्तेऽर्थस्य दुरागमात् ॥
जो अधर्म के द्वारा कमाये हुए धन से, परलोक साधक यज्ञादि कर्म करता है, वह मरने के पश्चात्, उसके फल को नहीं पाता, क्योकि उसका धन बुरे रास्ते से आया होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
विदुर नीति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

विदुर नीति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें