दुःखार्तेषु प्रमत्तेषु नास्तिकेष्वलसेषु च ।
न श्रीर्वसत्यदान्तेषु ये चोत्साह विवर्जिताः ॥
जो दुःख से पीड़ित, प्रमादी, नास्तिक, आलसी, अजितेन्द्रिय, और उत्साह रहित है, उनके वहाँ लक्ष्मी का वास नहीं होता।
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