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विदुर नीति • अध्याय 7 • श्लोक 57
अनिर्वेदः श्रियो मूलं दुःखनाशे सुखस्य च । महान्भवत्यनिर्विण्णः सुखं चात्यन्तमश्नुते ॥
उद्योग में लगे रहना, उस से बिरक्त न होना, धन, लाभ और कल्याण का मूल है। इसलिये उद्योग न छोड़ने वाला मनुष्य महान् हो जाता है, और अनन्त सुख का उपभोग करता है।
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