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विदुर नीति • अध्याय 7 • श्लोक 55
कर्मणा मनसा वाचा यदभीक्ष्णं निषेवते । तदेवापहरत्येनं तस्मात्कल्याणमाचरेत् ॥
मनुष्य मन, वाणी, और कर्म से जिसका निरन्तर सेवन करता है, वह कार्य उस पुरुष को अपनी ओर खींच लेता है। इसलिये सदा कल्याणकारी कार्यो को ही करें।
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