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विदुर नीति • अध्याय 7 • श्लोक 54
आयत्यां प्रतिकारज्ञस्तदात्वे दृढनिश्चयः । अतीते कार्यशेषज्ञो नरोऽर्थैर्न प्रहीयते ॥
जो आने वाले दुख को रोकने का उपाय जानता है, वर्तमानकालीन कर्तव्य के पालन में दढ़ निश्चय रखने वाला है, और अतीत काल में जो कर्तव्य शेष रह गया है, उसे भी जानता है, वह मनुष्य कभी अर्थ से हीन नहीं।
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