इन्द्रियाणामनुत्सर्गो मृत्युना न विशिष्यते ।
अत्यर्थं पुनरुत्सर्गः सादयेद्दैवतान्यपि ॥
इन्द्रियों को सर्वथा रोक रखना तो, मृत्यु से भी बढ़कर कटिन है,और उन्हें बिलकुल खुली छोड़ देना, देवताओं का भी नाश कर देता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
विदुर नीति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
विदुर नीति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।