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विदुर नीति • अध्याय 7 • श्लोक 50
कृतज्ञं धार्मिकं सत्यमक्षुद्रं दृढभक्तिकम् । जितेन्द्रियं स्थितं स्थित्यां मित्रमत्यागि चेष्यते ॥
मित्र तो ऐसा होना चाहिये, जो कतज्ञ, घार्मिक, सत्यवादी, उद्दार दढ़ अनुराग रखने वाला, जितेन्द्रिय, मर्यादा के भीतर रहनेवाला, और मैत्री का त्याग न करने वाला हो।
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