अवलिप्तेषु मूर्खेषु रौद्रसाहसिकेषु च ।
तथैवापेत धर्मेषु न मैत्रीमाचरेद्बुधः ॥
विद्वान् पुरुष को उचित है, कि अभिमानी, मुर्ख, क्रोधी, साहसिक, और धर्महीन पुरुषों के साथ मित्रता न करे।
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